ना झटको ज़ुल्फ़ बेरुख़ी से
इसमे अटका है, दिल कांच का
ना फे़रो नज़र बेहिचक, इनसे
बंधा है धागा रुकी सांस का
ज़रा आहिस्ता करो ये पेश-कदमी
आगे फ़िसलन है मेरे ख़यालों की
भर के आह पूछ लें नाम तुमसे
बस इतनी अज़्म, मेरे सवालों की
इसमे अटका है, दिल कांच का
ना फे़रो नज़र बेहिचक, इनसे
बंधा है धागा रुकी सांस का
ज़रा आहिस्ता करो ये पेश-कदमी
आगे फ़िसलन है मेरे ख़यालों की
भर के आह पूछ लें नाम तुमसे
बस इतनी अज़्म, मेरे सवालों की