Friday, August 9, 2013

saanjh

दिन फिर थक के घर लौटा है,
उसी रोशनदान क रस्ते..
जिस खिड़की से कूद सुबह वो,
कर जाता है पार फलक को...

Wednesday, July 31, 2013

शौक ए गुल

नही शौक ए गु़ल, हमे खा़र का है
खिजा़ं मे रूठी बहार का है
चैन ओ सुकून ए बेजा़री का
दिलचस्प ये दिल बेक़रारी का

उलझी ज़ुल्फों के पेचों का
ना सुर्ख हसीं रुख्सार का है
हुस्न ए तमन्ना ना जिस्म ए तलब
न ही तफ्स किसी इज़हार का है

है शोक बदलते वादों का
नए वक़्त में भूली यादों का
मिलते हैं सूखे फूल जहाँ
उन आधी पढ़ी किताबों का

हमे शोक नहीं तिलिस्मों का
दोज़ख जन्नत की किस्मों का
बस जुस्तजू इस राज़ की है
ये धुन किस टूटे साज़ की है

Sunday, April 28, 2013

नफरत रंजिश

नफरत रंजिश तो ऊंची है 
  एहतराम ए इश्क़ बस खो बैठे 
क्या तोडें ख़ुदा तराशा जो 
  बेमज़हब काफ़िर हो बैठे

Wednesday, April 24, 2013

shaam ki chai

घर में घुसते 
थका जान कर
ले आयी फिर
शाम की चाय

कितनी मीठी करदी माँ ने
नाश्ते की मेरी कड़वी बातें

Tuesday, April 23, 2013

patjhadd


पीले रंग के ये सब पत्ते
शाख से गिर के ढेर पड़े है

जला दो ये सब सूखे ही है
मैं कल फिर अरमाँ सीचूंगा

Sunday, January 13, 2013

jhoothey aks

Mai chala gaya hun uss din se
Hain jis din se dhaage toote
Har uss waqt ki yaadon se
Jis pal se gaye lamhe roothey

Har uss darakht ki shaakhon se
Un sab khwaabon ki aakhon se
Jin shaakhon se hai khwab gire
Or palkon k hain gul lootey

Nikal chuka hu door bohot
Aawaz na do kal k saathi
Na dhundho muje parchhayi me
Hain aks mere saare jhootey

Mat jodo girah baandh baandh
Mai chala gaya hun us din se...