Living Between the Lines
Friday, August 9, 2013
saanjh
दिन फिर थक के घर लौटा है,
उसी रोशनदान क रस्ते..
जिस खिड़की से कूद सुबह वो,
कर जाता है पार फलक को...
Newer Posts
Older Posts
Home
Subscribe to:
Comments (Atom)