Sunday, April 28, 2013

नफरत रंजिश

नफरत रंजिश तो ऊंची है 
  एहतराम ए इश्क़ बस खो बैठे 
क्या तोडें ख़ुदा तराशा जो 
  बेमज़हब काफ़िर हो बैठे

Wednesday, April 24, 2013

shaam ki chai

घर में घुसते 
थका जान कर
ले आयी फिर
शाम की चाय

कितनी मीठी करदी माँ ने
नाश्ते की मेरी कड़वी बातें

Tuesday, April 23, 2013

patjhadd


पीले रंग के ये सब पत्ते
शाख से गिर के ढेर पड़े है

जला दो ये सब सूखे ही है
मैं कल फिर अरमाँ सीचूंगा